शुक्रवार, 18 अगस्त 2017

बरसात के मौसम में मौसमी बिमारियां बेघर लोगों पर मार

मौसम के बदलाव के कारण बेघर लोगों पर बिमारी की मार पड़ी ऐसी कि दस्त, पेट दर्द, फोडे-फुंसी, खांसी, जुखाम, बुखार, कमजोरी, दाद, खुजली के ज्यादा मरीज सामने रहे है।

सेन्टर फाॅर इक्विटी स्टडीज के माध्यम से चलाया जा रहा ‘‘हाॅमलेस स्ट्रीट मेडिसीन कार्यक्रम’’ के दौरान पता लगा कि मौसम के बदलते ही बेघर की की झुग्गीयों में बिमारिया दस्तक दे रही है, सबसे ज्यादा खांसी, जुखाम, बुखार, फोडे-फुंसी की समस्यायें लेकर सामने रही है। बारिश आने के साथ ही बदलते मौसम में बीमारियों का प्रकोप अधिक बढ़ जाता है। बेघर लोगों के बीच दिसम्बर 2016 से 16 अगस्त 2017 तक कुल 3604 बेघर लोगों को धर्मकांटा-रावण गेट, 200 फिट बाई पास, कावेरी पथ, वी.टी. रोड़ मानसरोवर, विध्याधर नगर, जे.एल.एन. मार्ग, एम.आई. रोड़ खासा कोठी पुलिया के नीचे बीमार लोगों को लाभ पहुंचाया है। 

इस मौसम मे यह मौसमी बिमारीया के ज्यादा लोग है। बेघर लोग अस्पतालों मे जाते है तो उनका नम्बर ही नहीं पाता है और उन्हें कोई इज्जत नहीं दि जाती है। मौसम मे होने वाले बदलाव के साथ ही कमजोरी होने के कारण बच्चे बीमारियों से अधिक पीडि़त होते है। बच्चों को ठीक से पोषण नहीं मिल पाता है। वे कई बार ये बीमारियां अन्धरूनी अंगों को भी प्रभावित कर देती है, ऐसे में सावधानी ही इनका सबसे बड़ा उपचार होता है। इनके लिए प्रशासन द्वारा पीने के पानी की व्यवस्था और ना ही शौच के लिए शौचालयों की व्यवस्था की है। यह लोग खुल्ले में शौच करने को मजबूर है।

बेघर लोगों की झुग्गीयों में आस पास गन्दगी का जमा होने के कारण मच्छरों द्वारा काटे जाने पर बच्चों को फोडे-फुंसी, बुखार का आना बहुत ज्यादा परेशानी सामने रही है। क्योंकि मच्छर ही बारिश की गन्दगी के कारण गन्दे पानी पनपते है।

भँवर लाल कुमावत (पप्पू ) 
19.8.2017


बुधवार, 1 मार्च 2017

गुलाबी शहर जयपुर की बंजारा बस्ती 200 फिट बाई पास पर रह रहे बेघर लोगों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य कैम्प लगाया गया।

दिनांक 1 मार्च 2017 को सांय 6.30 बजे से रात 9.30 बजे तक बंजारा बस्ती 200 फिट बाई पास अजमेर दिल्ली मार्ग जयपुर पर सेन्टर फाॅर इक्विटी स्टडीज जयपुर के द्वारा ‘‘होमलेस स्ट्रीट मेडिसीन कार्यक्रम’’ के तहत निःशुल्क कैम्प का आयोजन किया गया। जिसमें डाॅ. अविरल श्रीवास्तव, नर्स दिन दयाल, भँवर लाल कुमावत, शीवा पी.यू.सी.एल. के इन्र्टस साथीयों ने अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई। कैम्प के दौरान 46 महिला, पुरुष बच्चों ने अपनी अपनी बिमारियों को दिखा कर निःशुल्क दवाईयां प्राप्त की गई। इन सभी लोगों में मुंह मे छाले, खासी, सर्दी-जुखाम, आँखों में खुजली, बुखार, पांव में चोट, पांव में घाव, दस्त, पेट दर्द, शरीर में दर्द, कान, गर्दन दर्द, आँखों से पानी आना इत्यादि बिमारियां सामने आई।

सेन्टर फाॅर इक्विटी स्टडीज जयपुर द्वारा सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना जयपुर शहर के बेघर लोगों के लिए 5 क्षेत्र में (हसनपुरा पुलिया के नीचे, 22 गोदाम पुलिया के नीचे, वी.टी. रोड़ मानसरोवर, धर्मकांटा मानसरोवर मेट्रो स्टेशन के पास, बंजारा बस्ती 200 फिट बाई पास गांधी पथ के पास) जाकर रोजाना निःशुल्क स्वास्थ्य कैम्प का आयोजन किया जाता है और निःशुल्क दवाईयां वितरित भी की जाती है।

हसनपुरा पुलिया के नीचे, 22 गोदाम पुलिया के नीचे, वी.टी. रोड़ मानसरोवर, धर्मकांटा मानसरोवर मेट्रो स्टेशन के पास, बंजारा बस्ती 200 फिट बाई पास गांधी पथ के पास यह वह क्षेत्र जहां लोग खुल्ले आसमान के नीचे तीरपाल लगा कर अपना जीवन बहर कर रहे, आम जीवन में यह सभी लोग कचरा बीनना, जुते पालिस, मजदूरी, ढोल बजाने, साफ-सफाई, खेल दिखाने का कार्य करते है। इन जगह पर नगर निगम द्वारा कोई भी पानी, शौचालय बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है। इन लोगों को दूर-दूर जाकर पानी भरकर लाना होता है और शौचालय के लिए औरतो बच्चों को बहुत दूर जाना होता है अगर आस-पास बैठ कर शौच करते है तो इन्हे मध्यम वर्ग के लोगों से गालिया और ताने भी सुनने को मिलते है। अधिकतर लोगों की कोई पहचान नहीं होने के कारण इन लोगों को कोई सुविधाये भी नहीं मिलती है जैसे राशन, पेंशन, बैंक में खाता इस तरह की। इनकी परेशानी के लिए हमने नगर निगम को भी लिख कर दिया लेकिन नगर निगम ने भी आज दिन तक कोई सुध नहीं ली है। हम यह देख सकते है कि गुलाबी शहर जयपुर को यही लोग कचरा बिन कर या उठा कर साफ सुथरा रखते है और मजदूरी करके शहर की अनेको बिल्डींग खडी हो रही उसमे इन बेघर लोगो का कितना बडा योगदान रहता है और इसी योगदान के बदले जयपुर का प्रशासन इन लोगों कोई सुध तक नही लेता है।

सेन्टर फाॅर इक्विटी स्टडीज का बेघर लोगों के लिए स्वास्थ्य चिकित्सा सेवायें देना है। सेन्टर फाॅर इक्विटी स्टडीज जयपुर ने दिसम्बर माह में निःशुल्क चिकित्सा सेवायें शुरू की गई अब तक जयपुर शहर के लगभग 1000 बेघर लोगों को चिकित्सा सेवायें दवाईयों सहित दे चुका है और आगे भी प्रयासरत है।

इस कार्यक्रम आप भी हमारी मदद कर सकते है अगर आप सहयोग करना चाहते है तो आप दवाईयों के रूप में सहयोग कर सके तो आप लोगों की मेहबानी होगी।

मदद करने के लिए सम्पर्क करे - भँवर लाल कुमावत (पप्पू) 9887158183


भँवर लाल कुमावत (पप्पू)

शुक्रवार, 10 मई 2013

जयपुर की बेटियों के कत्लेआम की उद्योग अनिल हॉस्पिटल के बाहर प्रदर्शन। राजस्थान मेंडिकल कांउसिल से लाईसेंस रद्द करने की मांग।



दिनांक 10 मई 2013 को शाम 5.45 बजे से  लिंग जांच एवं कन्या भू्रण हत्या विरोधी जन अभियान की ओर से अनिल हॉस्पिटल, खरबूजा मंण्डी के बाहर जम कर प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों का मानना था कि पिछले 2 दशक से भी अधिक वर्षों से डॉ  अनिल कुमार लिंग जांच एवं बेटियों के कत्लेआम की एक उद्योग चला रहे थे और उनकी चुनौति थी कि उन्हें कोई भी कभी नहीं पकड सकता है। 2 मई 2013 को एक स्टिंग ऑपरेसन  में 15000/- -रूपये में लिंग जांच करते हुए रंगे हाथों पकडे गये। डॉ अनिल कुमार अभी जयपुर के केन्द्रीय कारागाह में है और उनकी जमानत के आवेदन निचली अदालत से खारिज हो गई है। 

सभी ने मांग की डॉ अनिल कुमार का लाईसेंस राजस्थान मेडिकल कांउसीयल द्वारा पूर्ण रूप से रद्द किया जाना चाहिये और यह भी मांग की राज्य सरकार कानूनी लडाई में बिल्कुल भी कोताई ना बरते जिससे डॉ अनिल कुमार को सख्त से सख्त सजा हो। 



प्रदर्शनकारी जिसमें डॉ नरेन्द्र गुप्ता, कविता श्रीवास्तव, निशात हुसैन, अनिता माथुर, राजन चोधरी, कमल टांक, भँवर लाल कुमावत, कृष्णा एवं विद्यी अध्ययन के छात्र-छात्राओं ने अपने प्रदर्शन के जरिए मौहल्ले मे अपील की कि सभी डॉ अनिल कुमार, पूरे स्टाफ व अस्पताल का सामाजिक बहिष्कार करे। मौहल्ले वालों में से अनेक लोग सामने आये और उन्होंने डॉ अनिल कुमार की कारगुजारी का खुलासा किया व अपने व अपने परिवार के साथ हुये धौके को अपनी जुबानी रखा।   

बुधवार, 24 अप्रैल 2013

पी यू सी एल राजस्थान द्वारा द्वितीय सुश्री हेमलता प्रभू मेमोरियल व्याख्यान



कला, शिक्षा व नागरिकता

द्वितीय सुश्री हेमलता प्रभू मेमोरियल लेक्चर दिनांक 23 अप्रेल, 2013 को सांय 5.45 बजे से रंगायन हॉल, जवाहर कला केन्द्र, जे.एल.एन. मार्ग, जयपुर में किया | इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता मल्लीका साराभाई, विश्वविख्यात नृत्यागना रहेंगी जो ‘‘कला, शिक्षा व नागरिकता’’ शिर्षक पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। व्याख्यान माला की पहली कड़ी में एन.एस.डी. की प्रोफेसर त्रिपुरारी शर्मा ने व्याख्यान दिया। 



व्याख्यान माला की दूसरी कड़ी में अपनी बात रखते हुए मल्लीका साराभाई ने कहा कि वे हमेशा अपनी कला एवं काम को शिक्षा के क्षेत्र व महिला सशक्तिकरण के दायरे में देखती है। 30 वर्ष से ज्यादा दर्पणा एकेडमी के मंच से उन्होंने कला के हर स्तर को बढाने की कोशिश की है चाहे वह शास्त्रीय हो या वर्तमान हो। 1989 में उन्होंने अपना ‘‘शक्ति-दा पावर ऑफ वूमन’’ नाट्क से सामाजिक बदलाव की ओर काम करना शुरू किया व मध्य 90 के दशक में उन्होंने अपनी ही परिभाषा नृत्य को दी जिसमें न्याय, समानता, कला, खुबसूरती, स्थेटीक्स इत्यादि में एक समग्रता लाते हुए विश्वभर में अपने काम को फैलाया। इसी क्रम में जब गुजरात में 2002 में कत्लेआम हुआ उनके लिए सहज था कि वे न्याय के लिए खड़े हो और अपनी कला से नफरत की राजनिती से ऊपर लोगों को उठाये। इसी तरह 2009 का चुनावी संघर्ष एक सत्याग्रह था। बस एक ही विश्वास है कि कला ही सिर्फ एक माध्यम है जिससे बदलाव आयेगा। 

व्याख्यान में विशेष टिप्पणी प्रो. लोकनाथन, भौतिक विज्ञान (सेवानिवृत्त, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर) की होगी, जो सुश्री हेमलता प्रभू को लम्बे समय से जानते थे। ने कहा कि वे 1969 से सुश्री हेमलता प्रभू एवं उनकी साथी सुश्री कृष्णा तरवे कोे जानते थे। उन्होंने कहा कि सुश्री प्रभू जयपुर 1944 अपने पिता के साथ छुट्टीयां मनाने आई थी और उन्होंने जयपुर शहर को अपना लिया और जयपुर को एक अनूठी नागरिक प्राप्त हुई जिसने अपना पूरा जीवन कला, शिक्षा और जिम्मेदार नागरिक स्थापित करने में समर्पित किया। 

व्याख्यान में विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता अरूणा रॉय, शिक्षाविद शारदा जैन, अनेक छात्र/छात्राऐं एवं अनेक महिला आंदोलन की कार्यकर्ताये शामिल हुई।  


प्रदर्शनी का उदघाटन 

व्याख्यान से पूर्व 4.30 बजे सुक्रीती कला दिर्घा जवाहर कला केन्द्र में बोध शिक्षा समिति, दिगंतर एवं विहान द्वारा चलाये जा रहे विद्यालयों के बच्चों द्वारा बनाई गई चित्रकला की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। कुल 125 कलाकृतियां 92 बच्चों द्वारा बनाई गई थी, जिसमें लकड़ी के खिलौने, टेराकोटा का कार्य, पेपर मेरसी, ग्लास पेन्टींग, कॉर्लाज, क्राफ्ट कार्य है जिन्हें प्रदर्शीत किया। 



यह प्रदर्शनी क्यों?  सुश्री हेमलता प्रभू आरंभ से ही वंचित वर्ग के सभी बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रतिबद्ध थीं। उन्होंने 1989 से वंचित बच्चों की शिक्षा के लिए जयपुर के अन्य साथियों के साथ बोध शिक्षा समिति की स्थापना की। सुश्री प्रभू का ताल्लुक इन बच्चों के संग वैसा ही था जैसे उन्होंने महारानी गायत्री देवी गर्ल्स पब्लिक स्कूल, महारानी कॉलेज व कॉनोडिया कॉलेज की छात्राओं के साथ बनाया था। उनकी एक ही चाह थी कि इन बच्चों के लिए भी सबसे उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त हो। आज बोध शिक्षा समिति अलवर के थानागाजी में दूरदराज की ग्रामीण लड़कियों के लिए आवासीय विद्यालय चला रही है व कूकस में जयपुर शहर के गरीब बच्चों के लिए आवासीय विद्यालय चला रही है व जयपुर की ढेरांे कच्ची बस्तियों में सरकारी विद्यालय में शिक्षकों व छात्रों के साथ लगातार शैक्षणिक हस्तक्षेप का कार्य कर रही है।  

दिगंतर शिक्षा एवं खेलकूद समिति जो पिछले 23 वर्षो से जगतपुरा के भावगढ़ व रतवाली में पिछड़े वर्ग के बच्चों के लिए विद्यालय चला रही है। जयपुर शहर के हाशिए से सटे इन गांवों में बालिका शिक्षा की स्थिति में सुधार की दिशा में दिगंतर ने महत्वपूर्ण कार्य किया है और अब इन इलाकों में जहां पहले बालिकाएं स्कूल तक नहीं जाती थीं वे अब महाविद्यालयों तक शिक्षा प्राप्त करने की पहल कर रही हैं। दिगंतर के दोनों स्कूलों के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा में बच्चों को कैसे पढ़ाया जाए व बच्चों का संपूर्ण विकास कैसे हो, इसकी बुनियादी समझ निकलती है।

वहीं विहान संस्थान जयपुर की त्रिवेणी नगर की कच्ची बस्ती में पिछले 10 वर्षो से शिक्षा से वंचित 200 बच्चों के लिए एक प्रायोगिक विद्यालय चला रहा है। विहान का लक्ष्य है कि समाज के वंचित वर्ग के बच्चों को विकास के समान अवसर प्राप्त हों और वे शिक्षा के जरिए समाज में सम्मानजनक स्थान हासिल कर पाएं।




इन सभी संस्थाओं में कला को संपूर्ण विकास के लिए असरदार अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में देखती हैं। आज के इस अवसर पर सुश्री हेमलता प्रभू की स्मृति में इन तीनों विद्यालयों के बच्चों द्वारा बनाए गए चित्रों की एक प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। बच्चों द्वारा बनाए गए चित्र उनकी इस समझ की सशक्त प्रस्तुति है। आज की यह प्रदर्शनी सुश्री हेमलता प्रभू को समर्पित है।

सुश्री हेमलता प्रभू के बारे में:- सुश्री हेमलता प्रभू चैन्नई में पली-बढी लेकिन उन्होंने अपना पूरा जीवन जयपुर व राजस्थान को दिया। कला, शिक्षा व नागरिकता के क्षेत्र में उनका अभूतपूर्व योगदान रहा । जयपुर में महिला शिक्षा की स्थापना में अग्रणी रही व 20 वर्ष (1945-66), महारानी कॉलेज में अंग्रेजी की प्राध्यापिका रही । 1966 मंे कॉनोडिया कॉलेज की स्थापना की व 1982 तक कार्य किया। वह राजस्थान में पहली  नाट्य निर्देशीका रही व  नाट्य निर्देशन के क्षेत्र में अदभूत काम किया। राजस्थान में महिला आंदोलन की स्थापना व सती प्रथा के विरूद्ध आंदोलन का नेतृत्व किया। मानवाधिकार संस्थान पी.यू.सी.एल. की राजस्थान ईकाई की सहसंस्थापिका रही व 2006 में देहान्त हुआ।

कला, शिक्षा व नागरिकता का मंच क्यों? सुश्री हेमलता प्रभु, के साथ जुडे यह तीन शब्द कला, शिक्षा व नागरिकता, जो आमतौर से एक लगते हैं, इन तीनों को अपने में समेटे हुए थीं। वे एक शिक्षक थीं जो कला एवं मंच से जुड़ी रहीं और उनका मानव अधिकार की लड़ाई से भी गहरा रिश्ता था। एक व्यक्तित्व जो इन तीन चीजों को समेटे हुए था वह आज हमारे लिए एक प्रेरणा का स्रोत तो हैं ही। इस तरह के व्यक्तित्व और इन तीन शब्दों को एक साथ सोचने के लिए यह आज का दिन ज्यादा खास है। खास इसलिए कि आज हम एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहां हमने हर चीज को बहुत बांट दिया है। हमने केवल धर्म को ही नहीं बांटा, हमने हर किसी को खेमे में बांट दिया है। उसको समग्रता में पूनः लाने के लिए यह मंच कार्यरत है। 

गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

बुधवार, 20 फ़रवरी 2013

घरेलू महिला कामगार यूनियन की विशाल जनसुनवाई


25 फरवरी 2013 से सघन आंदोलन का ऐलान

समर्थन में आये सामाजिक कार्यकर्ता अरूणा रॉय, विधायक प्रताप सिंह खाचरियवास, महापौर ज्योति खण्डेलवाल, बाल आयोग अध्यक्ष दीपक कालरा व अनेक सामाजिक संगठन



सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती अरूणा रॉय, महिला कामगार यूनियन की सचिव मेवा भारती, पी.यू.सी.एल. के अध्यक्ष श्री प्रेमकृष्ण शर्मा, महिला संगठन की रेणुका पामेचा, निशात हुसैन इत्यादि के नेतृत्व में हजारों की संख्या में जयपुर की घरेलू महिला कामगार यूनियन आज जयपुर के उद्योग मैदान मे जुटी। दुनिया के मजदूर हम एक है, सबको राशन दो, पेंसन दो, अशोक गहलोत होश में आओ, सामाजिक सुरक्षा कानून तुरंत लाओं, मेहनतकश  की मजदूरी बढ़ाओं, जयपुर पुलिस होश  में आओ, बहन-बेटियों को सुरक्षा दिलवाओं, के नारे लगाते हुए दिनभर जनसुनवाई आयोजित हुई।

पुरजोर शब्दों में उन्होंने कहा कि वे लोग लम्बे समय से जयपुर में रह रहे है और दिन-रात मेहनत से इस शहर के घर-घर को साफ रखती है, बच्चें पालती है, फिर भी उन्हें जयपुर शहर और प्रशासन न बाहरी मानता है, और तो और क्योंकि वे बंगाल से है, उन्हें बंगलादेशी  कह कर उनकी इज्ज़त, उनकी मेहनत  एवं उनके खून-पसीने के श्रम और पहचान को ध्वस्त कर दिया जाता है। 

नाराज़गी जताते हुए हीरन बर्मन, शीतल चैधरी, सोहनी देवी, गीरू बाला, संतोष व मीनू ने बताया बताया कि कैसे इनकी मजदूरी, न्यूयोक्त काट लेते है। उन्हें चोरी के इल्जाम में पुलिस के हवाले कर दिया जाता है जब वे अपनी मेहनत का दाम मांगती है । वे और उनकी बेटियां घरों में असुरक्षित रहती है, जब वे पुलिस के पास जाते है तो पुलिस उन्हीं को थाने के बाहर भगा देता है। ना कोई पहचान पत्र, ना राशनकार्ड, ना कोई सामाजिक सुरक्षा, ना बुजुर्ग को पेंसन, ना बस्तियों में आंगनबाड़ी, ना पानी, ना बिजली, ना बस्तियों की सफाई हर तरह से उन्हें दोयम दर्जें का इंसान के रूप में उन्हें जीना पड़ता है। 

सबसे ज्यादा गुस्सा पुलिस के रवैये से था, 14 वर्षिय माधवी दास 25 जनवरी 2013 से लापता है। उसके परिवार को आये 8 दिन भी नहीं हुये थे। जिस घर में वह काम कर रही थी वहां से गायब कर दिया गया और वैशाली  नगर थाना की पुलिस व ए.सी.पी. आज दिन तक उस परिवार को आरोपी नहीं मान रही है। एफ.आई.आर. तक दर्ज नहीं की गई। इसी तरह ब्यूटी व पूजा बर्मन पिछले 24 घण्टे से लापता है और उन्हें मोती डूंगरी थाने की पुलिस कहती है कि ‘‘तुम अपनी बेटियों को ढूंढ़ लो’’। कोमल, सांत्वना व रोशन ने बताया कि कैसे वे अपनी मां के काम में घर-घर जाकर हाथ बटाती है उसके बाद स्कूल भी जाती है। अक्सर उन्हें गलत निगाहें एवं मारपीट सहनी पड़ती है। उन्होंने पूछा क्या गरीब के घर की लड़कियां इंसान नहीं है।  

राजस्थान राज्य बाल आयोग अध्यक्ष श्रीमती दीपक कालरा एवं सदस्य गोविन्द बेनिवाल ने बताया कि माधवी दास के मामले में नियुक्ता दारू के ठेकेदार के खिलाफ 2 एफ.आई.आर. दर्ज करने की सिफारिश  पुलिस को भेजी। क्योंकि माधवी दास केवल 14 वर्ष की है और राजस्थान बाल श्रम के नियमों के तहत 18 साल से कम श्रमिक को नौकरी नहीं दी जा सकती है। साथ ही लड़की लापता उनके घर से हुई तो इसलिए एफ.आई.आर. एवं गिरफ्तारी तुरंत होनी चाहिए। उन्होंने 'शिक्षा के अधिकार कानून के तहत महिलाओं को बोला कि अगर कहीं भी उन्हें 25 प्रतिशत  गरीबों के लिए आरक्षीत कोटे में उनके बच्चों को प्रवेश  नहीं मिले तो वे उनके पास आयें वे करायेंगे। उन्होंने जोर दिया कि सबसे पहली सुरक्षा बच्चियों  के लिए ’शिक्षा  है। 

घरेलू कामगार बहनों को सुनने और समर्थन देने पहुचें थे सिविल लाईंस ईलाके के विधायक प्रताप सिंह खाचरियावास, जिन्होंने  कहा कि ‘‘वे हर परिवार को राशन कार्ड दिलवायेंगे और बुजुर्ग महिला को पेंसन’’, उन्होंने वहां बैठे उपजिला रसद अधिकारी को बोला कि जो 6 हजार कामगार यूनियन की महिलाओ ने राशन कार्ड के आवेदन दिये थे उन्हेंराशन कार्ड उपलब्ध करवाया जाये। जिसके जवाब में उपजिला रसद अधिकारी ने आ’वासन दिया कि एक महिने के अंदर सबको वे राशन कार्ड  बनवा कर देंगे। उन्होंने यह भी आश्वासन  दिया कि वे विधान सभा में घरेलू कामगार महिलाओं के मुद्दे उठायेंगे। 

जयपुर पुलिस का प्रतिनिधित्व कर रहे डी.सी.पी. दक्षिण, डेन.के. जोस,  ने भरोसा दिया कि महिलायें पुलिस पर भरोसा रखे। वे उनकी नाराजगी को समझ रहे थे और उन्होंने वायदा किया कि पुलिस महकमे में पुलिस ट्रेनिंग के तहत हर स्तर के पुलिस कर्मचारी को जनता का दोस्त बनना होगा ना कि बोस । उन्होने लापता हुई लड़कियों के मामले को लेकर कहा कि वे तत्काल उसे देखेंगे। साथ ही जिन थानों में कामगार महिलाओ की पिटाई हुई थी जैसे वैशाली  नगर थाना, उसकी भी जांच के लिए राय देगे।

जयपुर की महापौर ज्योति खण्डेलवाल ने महिला कामगार बहनों को कहा कि वे एक औरत होने के नाते उनके दुख और संघर्षो को समझ सकती है और उन्होंने कहा कि वे लोग कभी भी अपनी समस्या लेकर उनसे मिलने आ सकते है और उन्होंने अपना फोन नं. 2311112 सबको दिया और कहा कि इस नम्बर पर ’शिकायत  दर्ज करवा सकते है कभी भी। श्रीमती अरूणा रॉय  के कहने पर सुनवाई के अधिकार कानून के तहत सभी आवेदनों पर कार्यवाही होनी चाहिये और बस्ती-बस्ती में, हर वार्ड में, हर जोन  में बने नगर निगम के दफ्तरों के बाहर कलर पेन्ट से टेलिफोन व जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारीयों के नम्बर लिखे होने चाहिये व ’शिकायत  की रसीद मिलनी चाहिये। जिस पर महापौर ने आ’वासन दिया कि वे जरूर जयपुर नगर निगम की जवाबदेही की प्रक्रिया को सम्पूर्ण रूप से पारदर्शी  बनायेंगी।  

श्रीमती अरूणा रॉय  ने घरेलू कामगार यूनियन की ताकत को सराहना की व उनके संघर्ष में अपना साथ देने का वायदा किया। उन्होंने राज्य के मंत्रियों व अधिकारियों को ललकारा और कहा कि जिस मजदूर के बलबूते घर और समाज चलता है अगर उसके श्रम को इज्जत नहीं होगी तो वो घर समाज खोखला हो जायेगा। उनके मूलभूत अधिकारों की गांरटी पर जोर दिया। 

घरेलू कामगार महिलाओं का एक दल मजदूर नेता हरकेश बुगालिया व उच्चतम न्यायालय के आयुक्त सलाहकार  अशोक  खण्डेलवाल के साथ मुख्य सचिव सी.के. मैथ्यू से मिले जिन्होंने सामाजिक सुरक्षा कानून बजट सत्र में लाने का वायदा किया व कामगार महिलाओं के मूलभूत सुविधाऐं जैसे राशन,  पहचान पत्र इत्यादि को लेकर प्राथमिकता से गौर करेगे। 

बैठक का संचालन महिला कामगार यूनियन की मेवा भारती एवं पी.यू.सी.एल. राजस्थान की महासचिव कविता श्रीवास्तव ने की।