बुधवार, 24 अप्रैल 2013

पी यू सी एल राजस्थान द्वारा द्वितीय सुश्री हेमलता प्रभू मेमोरियल व्याख्यान



कला, शिक्षा व नागरिकता

द्वितीय सुश्री हेमलता प्रभू मेमोरियल लेक्चर दिनांक 23 अप्रेल, 2013 को सांय 5.45 बजे से रंगायन हॉल, जवाहर कला केन्द्र, जे.एल.एन. मार्ग, जयपुर में किया | इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता मल्लीका साराभाई, विश्वविख्यात नृत्यागना रहेंगी जो ‘‘कला, शिक्षा व नागरिकता’’ शिर्षक पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। व्याख्यान माला की पहली कड़ी में एन.एस.डी. की प्रोफेसर त्रिपुरारी शर्मा ने व्याख्यान दिया। 



व्याख्यान माला की दूसरी कड़ी में अपनी बात रखते हुए मल्लीका साराभाई ने कहा कि वे हमेशा अपनी कला एवं काम को शिक्षा के क्षेत्र व महिला सशक्तिकरण के दायरे में देखती है। 30 वर्ष से ज्यादा दर्पणा एकेडमी के मंच से उन्होंने कला के हर स्तर को बढाने की कोशिश की है चाहे वह शास्त्रीय हो या वर्तमान हो। 1989 में उन्होंने अपना ‘‘शक्ति-दा पावर ऑफ वूमन’’ नाट्क से सामाजिक बदलाव की ओर काम करना शुरू किया व मध्य 90 के दशक में उन्होंने अपनी ही परिभाषा नृत्य को दी जिसमें न्याय, समानता, कला, खुबसूरती, स्थेटीक्स इत्यादि में एक समग्रता लाते हुए विश्वभर में अपने काम को फैलाया। इसी क्रम में जब गुजरात में 2002 में कत्लेआम हुआ उनके लिए सहज था कि वे न्याय के लिए खड़े हो और अपनी कला से नफरत की राजनिती से ऊपर लोगों को उठाये। इसी तरह 2009 का चुनावी संघर्ष एक सत्याग्रह था। बस एक ही विश्वास है कि कला ही सिर्फ एक माध्यम है जिससे बदलाव आयेगा। 

व्याख्यान में विशेष टिप्पणी प्रो. लोकनाथन, भौतिक विज्ञान (सेवानिवृत्त, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर) की होगी, जो सुश्री हेमलता प्रभू को लम्बे समय से जानते थे। ने कहा कि वे 1969 से सुश्री हेमलता प्रभू एवं उनकी साथी सुश्री कृष्णा तरवे कोे जानते थे। उन्होंने कहा कि सुश्री प्रभू जयपुर 1944 अपने पिता के साथ छुट्टीयां मनाने आई थी और उन्होंने जयपुर शहर को अपना लिया और जयपुर को एक अनूठी नागरिक प्राप्त हुई जिसने अपना पूरा जीवन कला, शिक्षा और जिम्मेदार नागरिक स्थापित करने में समर्पित किया। 

व्याख्यान में विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता अरूणा रॉय, शिक्षाविद शारदा जैन, अनेक छात्र/छात्राऐं एवं अनेक महिला आंदोलन की कार्यकर्ताये शामिल हुई।  


प्रदर्शनी का उदघाटन 

व्याख्यान से पूर्व 4.30 बजे सुक्रीती कला दिर्घा जवाहर कला केन्द्र में बोध शिक्षा समिति, दिगंतर एवं विहान द्वारा चलाये जा रहे विद्यालयों के बच्चों द्वारा बनाई गई चित्रकला की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। कुल 125 कलाकृतियां 92 बच्चों द्वारा बनाई गई थी, जिसमें लकड़ी के खिलौने, टेराकोटा का कार्य, पेपर मेरसी, ग्लास पेन्टींग, कॉर्लाज, क्राफ्ट कार्य है जिन्हें प्रदर्शीत किया। 



यह प्रदर्शनी क्यों?  सुश्री हेमलता प्रभू आरंभ से ही वंचित वर्ग के सभी बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रतिबद्ध थीं। उन्होंने 1989 से वंचित बच्चों की शिक्षा के लिए जयपुर के अन्य साथियों के साथ बोध शिक्षा समिति की स्थापना की। सुश्री प्रभू का ताल्लुक इन बच्चों के संग वैसा ही था जैसे उन्होंने महारानी गायत्री देवी गर्ल्स पब्लिक स्कूल, महारानी कॉलेज व कॉनोडिया कॉलेज की छात्राओं के साथ बनाया था। उनकी एक ही चाह थी कि इन बच्चों के लिए भी सबसे उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त हो। आज बोध शिक्षा समिति अलवर के थानागाजी में दूरदराज की ग्रामीण लड़कियों के लिए आवासीय विद्यालय चला रही है व कूकस में जयपुर शहर के गरीब बच्चों के लिए आवासीय विद्यालय चला रही है व जयपुर की ढेरांे कच्ची बस्तियों में सरकारी विद्यालय में शिक्षकों व छात्रों के साथ लगातार शैक्षणिक हस्तक्षेप का कार्य कर रही है।  

दिगंतर शिक्षा एवं खेलकूद समिति जो पिछले 23 वर्षो से जगतपुरा के भावगढ़ व रतवाली में पिछड़े वर्ग के बच्चों के लिए विद्यालय चला रही है। जयपुर शहर के हाशिए से सटे इन गांवों में बालिका शिक्षा की स्थिति में सुधार की दिशा में दिगंतर ने महत्वपूर्ण कार्य किया है और अब इन इलाकों में जहां पहले बालिकाएं स्कूल तक नहीं जाती थीं वे अब महाविद्यालयों तक शिक्षा प्राप्त करने की पहल कर रही हैं। दिगंतर के दोनों स्कूलों के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा में बच्चों को कैसे पढ़ाया जाए व बच्चों का संपूर्ण विकास कैसे हो, इसकी बुनियादी समझ निकलती है।

वहीं विहान संस्थान जयपुर की त्रिवेणी नगर की कच्ची बस्ती में पिछले 10 वर्षो से शिक्षा से वंचित 200 बच्चों के लिए एक प्रायोगिक विद्यालय चला रहा है। विहान का लक्ष्य है कि समाज के वंचित वर्ग के बच्चों को विकास के समान अवसर प्राप्त हों और वे शिक्षा के जरिए समाज में सम्मानजनक स्थान हासिल कर पाएं।




इन सभी संस्थाओं में कला को संपूर्ण विकास के लिए असरदार अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में देखती हैं। आज के इस अवसर पर सुश्री हेमलता प्रभू की स्मृति में इन तीनों विद्यालयों के बच्चों द्वारा बनाए गए चित्रों की एक प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। बच्चों द्वारा बनाए गए चित्र उनकी इस समझ की सशक्त प्रस्तुति है। आज की यह प्रदर्शनी सुश्री हेमलता प्रभू को समर्पित है।

सुश्री हेमलता प्रभू के बारे में:- सुश्री हेमलता प्रभू चैन्नई में पली-बढी लेकिन उन्होंने अपना पूरा जीवन जयपुर व राजस्थान को दिया। कला, शिक्षा व नागरिकता के क्षेत्र में उनका अभूतपूर्व योगदान रहा । जयपुर में महिला शिक्षा की स्थापना में अग्रणी रही व 20 वर्ष (1945-66), महारानी कॉलेज में अंग्रेजी की प्राध्यापिका रही । 1966 मंे कॉनोडिया कॉलेज की स्थापना की व 1982 तक कार्य किया। वह राजस्थान में पहली  नाट्य निर्देशीका रही व  नाट्य निर्देशन के क्षेत्र में अदभूत काम किया। राजस्थान में महिला आंदोलन की स्थापना व सती प्रथा के विरूद्ध आंदोलन का नेतृत्व किया। मानवाधिकार संस्थान पी.यू.सी.एल. की राजस्थान ईकाई की सहसंस्थापिका रही व 2006 में देहान्त हुआ।

कला, शिक्षा व नागरिकता का मंच क्यों? सुश्री हेमलता प्रभु, के साथ जुडे यह तीन शब्द कला, शिक्षा व नागरिकता, जो आमतौर से एक लगते हैं, इन तीनों को अपने में समेटे हुए थीं। वे एक शिक्षक थीं जो कला एवं मंच से जुड़ी रहीं और उनका मानव अधिकार की लड़ाई से भी गहरा रिश्ता था। एक व्यक्तित्व जो इन तीन चीजों को समेटे हुए था वह आज हमारे लिए एक प्रेरणा का स्रोत तो हैं ही। इस तरह के व्यक्तित्व और इन तीन शब्दों को एक साथ सोचने के लिए यह आज का दिन ज्यादा खास है। खास इसलिए कि आज हम एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहां हमने हर चीज को बहुत बांट दिया है। हमने केवल धर्म को ही नहीं बांटा, हमने हर किसी को खेमे में बांट दिया है। उसको समग्रता में पूनः लाने के लिए यह मंच कार्यरत है। 

गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

बुधवार, 20 फ़रवरी 2013

घरेलू महिला कामगार यूनियन की विशाल जनसुनवाई


25 फरवरी 2013 से सघन आंदोलन का ऐलान

समर्थन में आये सामाजिक कार्यकर्ता अरूणा रॉय, विधायक प्रताप सिंह खाचरियवास, महापौर ज्योति खण्डेलवाल, बाल आयोग अध्यक्ष दीपक कालरा व अनेक सामाजिक संगठन



सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती अरूणा रॉय, महिला कामगार यूनियन की सचिव मेवा भारती, पी.यू.सी.एल. के अध्यक्ष श्री प्रेमकृष्ण शर्मा, महिला संगठन की रेणुका पामेचा, निशात हुसैन इत्यादि के नेतृत्व में हजारों की संख्या में जयपुर की घरेलू महिला कामगार यूनियन आज जयपुर के उद्योग मैदान मे जुटी। दुनिया के मजदूर हम एक है, सबको राशन दो, पेंसन दो, अशोक गहलोत होश में आओ, सामाजिक सुरक्षा कानून तुरंत लाओं, मेहनतकश  की मजदूरी बढ़ाओं, जयपुर पुलिस होश  में आओ, बहन-बेटियों को सुरक्षा दिलवाओं, के नारे लगाते हुए दिनभर जनसुनवाई आयोजित हुई।

पुरजोर शब्दों में उन्होंने कहा कि वे लोग लम्बे समय से जयपुर में रह रहे है और दिन-रात मेहनत से इस शहर के घर-घर को साफ रखती है, बच्चें पालती है, फिर भी उन्हें जयपुर शहर और प्रशासन न बाहरी मानता है, और तो और क्योंकि वे बंगाल से है, उन्हें बंगलादेशी  कह कर उनकी इज्ज़त, उनकी मेहनत  एवं उनके खून-पसीने के श्रम और पहचान को ध्वस्त कर दिया जाता है। 

नाराज़गी जताते हुए हीरन बर्मन, शीतल चैधरी, सोहनी देवी, गीरू बाला, संतोष व मीनू ने बताया बताया कि कैसे इनकी मजदूरी, न्यूयोक्त काट लेते है। उन्हें चोरी के इल्जाम में पुलिस के हवाले कर दिया जाता है जब वे अपनी मेहनत का दाम मांगती है । वे और उनकी बेटियां घरों में असुरक्षित रहती है, जब वे पुलिस के पास जाते है तो पुलिस उन्हीं को थाने के बाहर भगा देता है। ना कोई पहचान पत्र, ना राशनकार्ड, ना कोई सामाजिक सुरक्षा, ना बुजुर्ग को पेंसन, ना बस्तियों में आंगनबाड़ी, ना पानी, ना बिजली, ना बस्तियों की सफाई हर तरह से उन्हें दोयम दर्जें का इंसान के रूप में उन्हें जीना पड़ता है। 

सबसे ज्यादा गुस्सा पुलिस के रवैये से था, 14 वर्षिय माधवी दास 25 जनवरी 2013 से लापता है। उसके परिवार को आये 8 दिन भी नहीं हुये थे। जिस घर में वह काम कर रही थी वहां से गायब कर दिया गया और वैशाली  नगर थाना की पुलिस व ए.सी.पी. आज दिन तक उस परिवार को आरोपी नहीं मान रही है। एफ.आई.आर. तक दर्ज नहीं की गई। इसी तरह ब्यूटी व पूजा बर्मन पिछले 24 घण्टे से लापता है और उन्हें मोती डूंगरी थाने की पुलिस कहती है कि ‘‘तुम अपनी बेटियों को ढूंढ़ लो’’। कोमल, सांत्वना व रोशन ने बताया कि कैसे वे अपनी मां के काम में घर-घर जाकर हाथ बटाती है उसके बाद स्कूल भी जाती है। अक्सर उन्हें गलत निगाहें एवं मारपीट सहनी पड़ती है। उन्होंने पूछा क्या गरीब के घर की लड़कियां इंसान नहीं है।  

राजस्थान राज्य बाल आयोग अध्यक्ष श्रीमती दीपक कालरा एवं सदस्य गोविन्द बेनिवाल ने बताया कि माधवी दास के मामले में नियुक्ता दारू के ठेकेदार के खिलाफ 2 एफ.आई.आर. दर्ज करने की सिफारिश  पुलिस को भेजी। क्योंकि माधवी दास केवल 14 वर्ष की है और राजस्थान बाल श्रम के नियमों के तहत 18 साल से कम श्रमिक को नौकरी नहीं दी जा सकती है। साथ ही लड़की लापता उनके घर से हुई तो इसलिए एफ.आई.आर. एवं गिरफ्तारी तुरंत होनी चाहिए। उन्होंने 'शिक्षा के अधिकार कानून के तहत महिलाओं को बोला कि अगर कहीं भी उन्हें 25 प्रतिशत  गरीबों के लिए आरक्षीत कोटे में उनके बच्चों को प्रवेश  नहीं मिले तो वे उनके पास आयें वे करायेंगे। उन्होंने जोर दिया कि सबसे पहली सुरक्षा बच्चियों  के लिए ’शिक्षा  है। 

घरेलू कामगार बहनों को सुनने और समर्थन देने पहुचें थे सिविल लाईंस ईलाके के विधायक प्रताप सिंह खाचरियावास, जिन्होंने  कहा कि ‘‘वे हर परिवार को राशन कार्ड दिलवायेंगे और बुजुर्ग महिला को पेंसन’’, उन्होंने वहां बैठे उपजिला रसद अधिकारी को बोला कि जो 6 हजार कामगार यूनियन की महिलाओ ने राशन कार्ड के आवेदन दिये थे उन्हेंराशन कार्ड उपलब्ध करवाया जाये। जिसके जवाब में उपजिला रसद अधिकारी ने आ’वासन दिया कि एक महिने के अंदर सबको वे राशन कार्ड  बनवा कर देंगे। उन्होंने यह भी आश्वासन  दिया कि वे विधान सभा में घरेलू कामगार महिलाओं के मुद्दे उठायेंगे। 

जयपुर पुलिस का प्रतिनिधित्व कर रहे डी.सी.पी. दक्षिण, डेन.के. जोस,  ने भरोसा दिया कि महिलायें पुलिस पर भरोसा रखे। वे उनकी नाराजगी को समझ रहे थे और उन्होंने वायदा किया कि पुलिस महकमे में पुलिस ट्रेनिंग के तहत हर स्तर के पुलिस कर्मचारी को जनता का दोस्त बनना होगा ना कि बोस । उन्होने लापता हुई लड़कियों के मामले को लेकर कहा कि वे तत्काल उसे देखेंगे। साथ ही जिन थानों में कामगार महिलाओ की पिटाई हुई थी जैसे वैशाली  नगर थाना, उसकी भी जांच के लिए राय देगे।

जयपुर की महापौर ज्योति खण्डेलवाल ने महिला कामगार बहनों को कहा कि वे एक औरत होने के नाते उनके दुख और संघर्षो को समझ सकती है और उन्होंने कहा कि वे लोग कभी भी अपनी समस्या लेकर उनसे मिलने आ सकते है और उन्होंने अपना फोन नं. 2311112 सबको दिया और कहा कि इस नम्बर पर ’शिकायत  दर्ज करवा सकते है कभी भी। श्रीमती अरूणा रॉय  के कहने पर सुनवाई के अधिकार कानून के तहत सभी आवेदनों पर कार्यवाही होनी चाहिये और बस्ती-बस्ती में, हर वार्ड में, हर जोन  में बने नगर निगम के दफ्तरों के बाहर कलर पेन्ट से टेलिफोन व जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारीयों के नम्बर लिखे होने चाहिये व ’शिकायत  की रसीद मिलनी चाहिये। जिस पर महापौर ने आ’वासन दिया कि वे जरूर जयपुर नगर निगम की जवाबदेही की प्रक्रिया को सम्पूर्ण रूप से पारदर्शी  बनायेंगी।  

श्रीमती अरूणा रॉय  ने घरेलू कामगार यूनियन की ताकत को सराहना की व उनके संघर्ष में अपना साथ देने का वायदा किया। उन्होंने राज्य के मंत्रियों व अधिकारियों को ललकारा और कहा कि जिस मजदूर के बलबूते घर और समाज चलता है अगर उसके श्रम को इज्जत नहीं होगी तो वो घर समाज खोखला हो जायेगा। उनके मूलभूत अधिकारों की गांरटी पर जोर दिया। 

घरेलू कामगार महिलाओं का एक दल मजदूर नेता हरकेश बुगालिया व उच्चतम न्यायालय के आयुक्त सलाहकार  अशोक  खण्डेलवाल के साथ मुख्य सचिव सी.के. मैथ्यू से मिले जिन्होंने सामाजिक सुरक्षा कानून बजट सत्र में लाने का वायदा किया व कामगार महिलाओं के मूलभूत सुविधाऐं जैसे राशन,  पहचान पत्र इत्यादि को लेकर प्राथमिकता से गौर करेगे। 

बैठक का संचालन महिला कामगार यूनियन की मेवा भारती एवं पी.यू.सी.एल. राजस्थान की महासचिव कविता श्रीवास्तव ने की। 

गुरुवार, 14 फ़रवरी 2013

महिला हिंसा के विरूद्ध उमड़ते 100 करोड़ के जयपुर आयोजन में राज्यपाल श्रीमती माग्रेट अल्वा सहित


सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती अरुणा रॉय, जयपुर मेयर श्रीमती ज्योति खण्डेलवाल, महिला आयोग की अध्यक्षा डॉ. लाड़ कुमारी जैन, जयपुर कलेक्टर श्री रविकांत एवं आयुक्त बी.एल. सोनी, पत्रकार श्रीपाल शख्तावत व स्कूल व कॉलेजो के अनेको छात्र/छात्रायें की भागीदारी।





राजस्थान की प्रथम नागरिक, राज्यपाल श्रीमती माग्रेट आल्वा ने आज उद्योग मैदान, स्टेच्यू सर्किल, जयपुर पर आज 7000 से ज्यादा स्कूल और कॉलेज के युवा, पुलिस अधिकारी, महिला पंच सरपंच, साथिने, आंगनबाडी कार्यकर्ता, कच्ची बस्ती से मुसलमान व दलित महिलायें, षिक्षक, कर्मचारी, प्रषासक, सभी को आज शपथ दिलाई कि :-

  • मैं महिलाओं तथा लड़कियों के प्रति किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करूंगा/करूंगी|
  • मैं किसी भी व्यक्ति खासतौर से महिलाओं व लड़कियों के प्रति हिंसात्मक आचरण नहीं करूंगा/करूंगी|
  • मैं अपने साथ हिंसा होने पर चुप न हीं रहूंगा/रहूंगी|
  • मैं किसी भी महिला/लड़की के साथ हिंसा होने पर उसका पुरजोर विरोध करूंगा/करूंगी|


उन्होंने कहा कि ‘‘मै भी अपनी आवाज़ मिलाने आप सबके साथ आई हूँ क्योंकि मैं भी चाहती हूं कि इस धरती से महिलाओं पर हो रही हिंसा खत्म हो जाये।’’ यह वक्तव्य आज 14 फरवरी, 2013 को उमडते 100 करोड़ अभियान के जयपुर कार्यक्रम में राज्यपाल द्वारा दिया गया। विष्वभर में हो रहे कार्यक्रमों मे जयपुर की कड़ी बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इस आयोजन में 20 स्कूलों और कॉलेजो से करीब 4000 छात्र/छात्रायें, 2000 से अधिक पंच-सरपंच, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सबला समूह की किषोरियां, कच्ची बस्ती की महिलायें पुलिस के जवान, अधिकारी व 1000 से अधिक अलग-अलग यूनियनों, सचिवालय का कर्मचारी, अधिकारी व घरेलू कामगार यूनियन सहित लोग पहुंचे थे । इस तरह का मिला-जुला कार्यक्रम जिसमें राज्य व जिले के उच्चअधिकारीगण व छात्र, सामाजिक संगठन शामिल हुये हो वह कम जगह देखा गया।    

उमंग स्कूल, सेन्ट एनजल्म स्कूल, नोर्थ सिटी, निवारू रोड, महाराजा सवाई सिंह स्कूल, संस्कार स्कूल, सेन्ट एन्जेला सोफिया स्कूल, स्टेप बाई स्टेप, सवाई भवानी सिंह स्कूल, एस.वी. पब्लिक स्कूल, गांधी नगर स्कूल, कॉनोडिया कॉलेज, महावीर पब्लिक स्कूल, सेन्ट माईकल स्कूल, सेन्ट वील्डफ्रीड स्कूल, महिला पॉलीटेकनिक कॉलेज, वैदिक कन्या कॉलेज, जे.एन.यू. कॉलेज, अहग्रान स्कूल व कॉलेज, सेन्ट जेवियर स्कूल के छात्र/छात्राओं ने गीत, संदेष, नाच, कविता, नारे के ताने-बाने से यह कार्यक्रम बुना व तय किया कि वे दुनिया बदल के रहेंगे। 

सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती अरुणा रॉय ने सम्बोन्धित करते हुए कहा कि जब तक समाज में भेदभाव बना रहेगा महिला हिंसा समाप्त नहीं हो सकती और हमें अपनी आजादियां छीन कर लेनी होगी। चाहे वह घुमने-फिरने की आजादी हो या काम करने की आजादी हो। जयपुर की मेयर श्रीमती ज्योति खण्डेलवाल ने कहा कि सब महिलाओं को शुरूआत अपने आप से करनी होगी। जब तक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में महिलाये जीत कर नहीं पहुंचेगी हिंसा बन्द नहीं होगी। महिला आयोग की अध्यक्षा डॉ. लाड़ कुमारी जैन ने कहा कि महिला आयोग हर लड़की के लिए दिन-रात खडा हुआ है। जयपुर कलेक्टर श्री रविकांत एवं आयुक्त बी.एल. सोनी दोनो ने कहा कि सुरक्षित घर व सुरक्षित शहर का उद्देष्य तभी कायम हो सकता है जब महिला सुरक्षित हो। जिला कलेक्टर ने हर लड़की को कहा कि वे हमेषा खड़े होंगे उन सभी के साथ जो विरोध का स्वर उठाने को तैयार होंगे। पत्रकार श्रीपाल शख्तावत ने कहा कि अब वक्त विचार करने का नहीं है क्योंकि हर पल इस देष में बेटियों को जन्म नहीं लेने दिया जा रहा है। नौजवान पीढ़ी इसको बदल सकती है। तभी महिला के खिलाफ हिंसा समाप्त होगी। संस्कार स्कूल की प्राचार्य डॉ. रमा दत, राजस्थान विष्वविद्यालय का भूतपूर्व अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह राजावत, 20 साल से न्याय के लिए संघर्षरत महिला भंवरी देवी, कनोडिया कॉलेज की अध्यक्षा सुदेषना, घरेलू कामगार यूनियन की झूरमल अधिकारी, सचिवालय कर्मचारी यूनियन के षिव शंकर अग्रवाल, अधिकारी यूनियन के पूरन झरीवाल सभी ने अपनी बात रखी। 

कार्यक्रम की शुरूआत राखी द्वारा राजस्थान व जयपुर जिला का घटता लिंगानुपात के डरावने आंकड़े से शुरू किया व चेताया कि हम बहुत ही जल्दी हरियाणा बन जायेगे इसे रोका नही । कार्यक्रम का संयोजन शबनम अजीज व निषा सिद्धू ने किया। 





उमड़ते 100 करोड़ का कार्यक्रम राजस्थान में अजमेर शहर व अजमेर जिला (तिलोनिया, किशनगढ़), पाली, झालावाड़, प्रतापगढ़, राजसंमद के भीम व नाथद्वारा, उदयपुर, जोधपुर, बाड़मेर, बीकानेर, जालौर, मकराना, नागौर, कोटा, दौसा, सवाई माधोपुर, बांरा, चित्तौडगढ, चूरू, अलवर, डूंगरपुर, टोंक, जयपुर  इत्यादि 20 से ज्यादा जिलो में कार्यक्रम हुये। जगह-जगह रैली, प्रदर्षन, संगोष्ठी इत्यादि आयोजित की गई। 

उमड़ते 100 करोड़ के जयपुर व राजस्थान कड़ी के कार्यक्रम को सिर्फ एक इवेन्ट के रूप में नहीं देखा जा रहा है बल्कि यह कार्यक्रम महिला हिंसा मुक्त समाज को बनाने में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में है। आगामी 8 मार्च 2013 को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन हमारा अगला पड़ाव होगा। 


बुधवार, 13 फ़रवरी 2013

लड़कियों/औरतों पर हो रही हिंसा के खिलाफ खेजड़ी स्वास्थ्य केन्द्र द्वारा हस्ताक्षर अभियान शुरू हुआ।

दिनांक 13 फरवरी, 2013 को प्रातः 9 बजे से खेजड़ी सर्वोदय जनरल हैल्थ एवं आई केयर सेन्टर एवं वन बिलीयन राईजिंग के बैनर तले लड़कियों व औरतों पर हो रही हिंसा के खिलाफ अपने खेजड़ी स्वास्थ्य केन्द्र, टोडीरमजानीपुरा, जगतपुरा में शपथ हस्ताक्षर अभियान शुरू किया। जिसमें महिलाओं, लड़कियों व पुरूषों ने सैकडो की तादाद में हस्ताक्षर किये। कई पुरूषों ने धन्यवाद दिया कि यह अभियान बहुत अच्छा चला रहे है। सभी प्रतिनिधियों ने शपथ लेकर ही हस्ताक्षर किये शपथ है:- 

  • मैं महिलाओं तथा लड़कियों के प्रति किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करूंगा/करूंगी। 
  • मैं किसी भी व्यक्ति खासतौर से महिलाओं व लड़कियों के प्रति हिंसात्मक आचरण नहीं करूंगा/करूंगी। 
  • मैं अपने साथ हिंसा होने पर चुप न हीं रहूंगा/रहूंगी।
  • मैं किसी भी महिला/लड़की के साथ हिंसा होने पर उसका पुरजोर विरोध करूंगा/करूंगी। 


दिनांक 14.02.2013 को लड़कियों/औरतों पर हो रही हिंसा के खिलाफ ग्रीनवुड़, आशियाना अपार्टमेन्ट में रह रहे लोगों द्वारा सांय 6 बजे पोस्टर कम्पीटीशन आयोजित करेंगे। 











भँवर लाल कुमावत (पप्पू) 
(एस.एच.पी.-समन्वयक) 
खेजड़ी स्वास्थ्य केन्द्र, जगतनपुरा, जयपुर 
9887158183 

बुधवार, 16 जनवरी 2013

गैर सरकारी विद्यालय के बच्चों को विडियो प्रोजेक्टर के माध्यम से स्वास्थ्य शिक्षा के बारे में अवगत करवाना।


आईडियल पब्लिक स्कूल खोनागोरियान
खेजड़ी सर्वोदय जनरल हैल्थ एवं आई केयर सेन्टर के भँवर लाल कुमावत, विद्यालय स्वास्थ्य शिक्षा समन्वयक द्वारा दिनांक 16 जनवरी, 2013 को नवज्योति पब्लिक स्कूल उदयपुर गिलारिया एवं आईडियल पब्लिक स्कूल खोनागोरियान में कक्षा 3 से 8 तक के छात्र/छात्राओं को स्वास्थ्य शिक्षा जैसे हैल्थ हाईजिन एवं हाथ धोने की प्रक्रिया के बारे में विडियों प्रोजेक्टर के माध्यम से लगभग दोनों विद्यालय के 140 बच्चों के साथ चर्चा की जिसमें बच्चों ने बड़े ही मजे से विडियों देखे और सवाल-जवाब किये। बच्चों को विडियों के माध्यम से जो बातें बताई जाती है वह उनको उतनी ही जल्दी पकड़ते है और सिख पाते है। इसी दौरान विद्यालयें के अध्यापकगणों से भी बातचीत हुई की यह विडियो प्रोजेक्ट की प्रक्रिया कैसी लगी क्या बच्चें स्वाथ्य के बारे मे जान पायेंगे इसी माध्यम से तो सभी अध्यापकों का कहना था कि यह प्रक्रिया बहुत ही लुभावनी और आसानी से बच्चों को सीखाने की प्रक्रिया 80 प्रतिशत तक सफल होयेगी। विडियो के माध्यम से बच्चे हर बात को गोर से देखते है और सवाल करने की कोशिश करते है। 
नवज्योति पब्लिक स्कूल उदयपुर गिलारिया

                                                                                   
                                                                                                भँवर लाल कुमावत
                                                                                              समन्वयक, स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम 

शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

नफरत की राजनीति पर अंकुष जरूरी-तीस्ता सीतलवाड़ (पी.यू.सी.एल. का राष्ट्रीय अधिवेषन प्रारंभ, कुल ‘अद्रश्य भारत’ पुस्तक का लोकार्पण किया गया।)


देश में साम्प्रदायिक सद्भाव कायम करने के लिए नफरत की राजनीति करने वालों पर प्रभावी अंकुष लगाया जाना जरूरी है। यह विचार सुप्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्त्ता श्रीमती तीस्ता सीतलवाड़ ने पीपुल्स यूनियन  फॉर सिविल लिबर्टीज के 1-2  दिसम्बर 2012 राष्ट्रीय अधिवेषन के उद्घाटन के अवसर पर रखे।


कुमारानन्द भवन में प्रारंभ हुए  दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेषन का उद्घाटन करते हुए श्रीमती सीतलवाड ने कहा कि यह देष का दुर्भाग्य है कि नफरत का वातावरण कम करने का प्रयास करने के बावजूद भी साम्प्रदायिक घटनाएं अलग-अलग स्ािानांे पर होती रहती हैं। उन्होंने हाल ही में फैजाबाद, हैदराबाद और कोकराझार में हुई साम्प्रदायिक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन सबके मूल मं नफरत की राजनीति करने वालों का हाथ है। उन्होंने गुजरात के नरोडा पाटिया केस में न्यायालय के फेसले का स्वागत किया किन्तु कहा कि देष में अधिकांष न्यायालयों की प्रक्रिया सहानुभूतिपूर्ण व संवेदनषील नहीं है। महिलाओं, दलितों व गरीबों व अल्पसंख्यकों के प्रति न्यायालय में होने वाले व्यवहार की समीक्षा की जानी चाहिए तथा गलत फेसलों क विरोध का हक भी मिलवा चाहिए। उन्होनें न्यायालयों में सीसीटीवी लगवाकर रिकार्ड किये जाने की वकालत भी की। उद्घाटन के अवसर पर प्रतिष्ठित न्यायविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्री राजेन्द्र सच्चर ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूति के लिए मानवाधिकार आंदोलन का सषक्तिकरण आवष्यक है। इस अवसर पर मानवाधिकार आंदोलन में सक्रिय योगदान के लिए जस्टिस राजेन्द्र सच्चर  व तीस्ता सीतलवाड को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह में सुप्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती अरूणा रॉय ने राजेन्द्र सच्चर व तीस्ता सीतलवाड को योगदान को रेखांकित करते हुए उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय अधिवेषन की प्रांसगिकता को प्रस्तुत करते हुए संगठन के राष्ट्रीय महासचिव वी.सुरेष ने कहा कि देष के अधिकांष राजनैतिक दलों के विफल हो जाने के कारण मानवाधिकार एवं लोंकतंत्र के प्रति चुनौतियां अत्यधिक बढ़ गई हैं। उन्होंने देष में व्याप्त भ्रष्टाचार को भी मानवाधिकार के प्रति चुनौति बताते हुऐ कहा कि देष की नई आर्थिक नीतियां मानवाधिकार विरोधी है तथा इन के प्रति निगाह रखने की जरूरत है। वी. सुरेष ने मानवाधिकार विरोधी कानूनों राजद्रोह का कानून, विषेष जन सुरक्षा कानून, आर्म्ड फोर्सेस स्पेषल पावर एक्ट, यू.ए.पी.ए. आदि को दमनात्मक बताते हुए इन्हे समाप्त किये जाने की मांग की। देष के युवाज्यों को मानवाधिकार आंदोलन से जोड़ने का आह्वान करते हुए उन्होंने युवाओं के सपने साकार करना आवष्यक बतलाया। 

पी.यू.सी.एल. के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. प्रभाकर सिन्हा ने जन विरोधी कानूनों का उल्लेख करते हुए कहा कि अंग्रेजों ने तो गुलाम भारत पर रोलेट एक्ट लगाया था किन्तु आजाद भारत के कुछ कानून उससे भी ज्यादा क्रट व अमानवीय है। जनतंत्र में संसाधनों का उपयोग जनता के लिए होना चाहिए किन्तु दुर्भाग्य है कि संसाधन मुट्ठी भर लोगों के हाथ में सीमित है। प्रारंभ में राज्य महासचिव सुश्री कविता श्रीवास्तव में अधिवेषन की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा राज्य अध्यक्ष प्रेमकृष्ण शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

सम्मेलन के पहले दिन तीन सत्र आयोजित किये गये। प्रथम सत्र ‘अलोकतांत्रिक कानून एवं राज्य की निरंकुषता’ पर केन्द्रित था जिसकी अध्यक्षता डॉ. बिनायक सैन ने की। इस सत्र में छत्तीसगढ़ के राजेन्द्र सयाल, मणिपुर के बबलू लाईटोंग, मध्यप्रदेष की माधुरी व दिल्ली की करूणा नन्दी ने विचार प्रस्तुत किये। साम्प्रदायिकता एवं आतंकवाद के नाम पर राजनीति विषय पर आयोजित दूसरे सत्र में असम के सफदर राधा, कर्नाटक के पी.बी. दसा, दिल्ली के महताब, गुजरात के गौतम ठक्कर व राजस्थान के एम. हसन ने अपने-अपने राज्यों में साम्प्रदायिकता की समस्या को प्रस्तुत किया । देर रात आयोजित तीसरे सत्र का विषय विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों को हथियाने की राजनीति  पर चर्चा हुई । इस सत्र में छत्तीसगढ़ की सुधा भारद्वाज, राजस्थान के कैलाष मीणा, तमिलनाडु की फातिमा बानू आदि ने विचार व्यक्त किये।

पी.यू.सी.एल. की राज्य महासचिव सुश्री कविता श्रीवास्तव ने बताया कि सम्मेलन में 14 राज्यों के 350 प्रतिनिधि भाग ले रहे है। अधिवेषन के दूसरे दिन 2 दिसम्बर, रविवार को संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा की गई  तथा सुश्री भाषा सिंह के मैला ढोने वाले लोगों पर पुस्तक ‘अदृष्य भारत’ का लोकार्पण किया गया।      




भंवर   

प्रथम युवा लोकतंत्र एवं मानव अधिकार सम्मेलन जयपुर में संपन हुआ


पी.यू.सी.एल. की  सीमा आजाद, डॉ. बिनायक सैन, प्रभाकर सिन्हा ने किया उद्घाटन। 

पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज, राजस्थान पहला युवा, लोकतंत्र एवं मानव अधिकार सम्मेलन का आयोजन आज कानोडिया कॉलेज में किया। इस सम्मेलन में इस सम्मेलन में 250 से अधिक नौजवान एवं छात्र/छात्रायें पहुंचे।सम्मेलन के मुख्य उद्देश्य रखते हुये पी.यू.सी.एल. के कार्यकर्ताओ ने  कहा कि नौजवानों को मानवाधिकारों पर हो रहे हमलो और उनके लिए तैयार करना बहुत जरूरी हो गया है। उन्होंने पी.यू.सी.एल. संगठन के बारे में बताते हुये कहा कि राजस्थान पी.यू.सी.एल. तो नौजवानों का ही संगठन है इसलिए उसे और ताकतवर करना भी जरूरी है क्यों कि युवा ही आने वाले समय में कमजोर वर्गो के लिए न्याय की अगुवाई करेंगे। 

सीमा आजाद
इस सम्मेलन मे जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. बिनायक सेन, ने कहा कि अगर कुपोषण और भूख के प्रश्नो पर नौजवान चेतेगे नही तो इस देश में हम एक बहुत बड़ी मानवता की त्रास्ती देखेगे।  राष्ट्रीय पी.यू.सी.एल. अध्यक्ष प्रभाकर सिन्हा, ने मानवाधिकारो की सार्वभौमिकता का परिचय देते हुये कहा कि आज की स्थिति में जब भारत का संविधान आये दिन उल्लंघन किया जा रहा है उस संदर्भ में मानवाधिकारों का हनन होना ही है। इसलिए मानवाधिकार समुदाय को आंदोलन के रूप में खडा होना पडेगा तभी अलोकतांत्रिक तरिके से काम कर रही है सरकारों को जवाब देह बना सकेंगे । सत्र के मुख्यवक्ता लेखिका सीमा आजाद जिसको उत्तर प्रदेश की सरकार ने जेल के अंदर बंद कर दिया था एवं हाल ही में वे बेल लेकर निकली है ने कहा कि बोलने की आजादी के साथ कतई भी समझोता नहीं किया जा सकता। चाहे जेल भी जाना हो। उन्होंने नौजवानों को आव्हान किया कि वे समाज में कुछ कर दिखाये जिससे समाज में अन्याय खत्म हो। 

पी.यू.सी.एल. के महासचिव वी.सुरेश ने कहा कि अगर तुम बदलना चाहते हो तो वो बदलाव तुम स्वमं बनो। मणीपुर से आये बबलू लॉयटोंग बाम ने कहा कि आज हम चुप है जब आर्मी मणीपुरी लोगों के मानवाधिकार उल्लंघन करती है लेकिन कल ये सब जब आफसपा जैसा कानून पूरे भारत में लागू होगा तब बहुत देर हो चुकी होगी। इसलिए ईरोम शर्मीला की आवाज पूरे देश को उठानी चाहिये।  

इसी तरह अनेक सत्र नौजवानों ही संभाले एवं विकलांगता, महिला, साम्प्रदायिकता, जातिवाद एवं दलित अधिकार इत्यादि विषयों पर बात हुई। नौजवानों ने अनेक बीच में प्रश्नोउत्तरी रखी गई एवं नाट्य एवं फिल्म भी आयोजित कि गई। 

भंवर 


शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2012

भूख और कुपोषण मुक्त राजस्थान के लिए खाद्य अधिकार यात्रा का जयपुर पड़ाव


भूख और कुपोषण मुक्त राजस्थान के लिए खाद्य अधिकार यात्रा का जयपुर पड़ाव में 
स्टेच्यू सर्किल पर जन सभा आयोजित की गई एवं राजमहल पैलेस तक रैली निकाली गई।

मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन मुख्य सचिव से भेंट कर दिया गया। 
राज्यपाल एवं प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन को जिला प्रशासन ने प्राप्त किया।


आज राज्य के 38 से भी ज्यादा संगठनों ने मिलकर राज्य सरकार को ललकारा की ''ए.पी.एल. बी.पी.एल. खत्म करो, सबको सस्ता राशन, अनाज, दाल, तेल दो, वरना गद्दी छोड दो''।  यह नारे राज्य में चल रही पिछले हफ्तेभर से खाद्य सुरक्षा यात्रा के आगमन पर सभा में लगाये गये। 


”सबके लिए सस्ता अनाज, गोदामों के ताले खोलो एवं प्रभावी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून बनें“ को लेकर शुरू हुई राज्य स्तरिय यात्रा अलग-अलग इलाको से गुजर कर जयपुर पहुंची है। राजस्थान में यह यात्रा प्रदेश में बनी हुई चुप्पी को तोडने एवं जनता की न्यायपूर्ण मांगों के सर्मथन में निकाली जा रही है। खाद्य सुरक्षा यात्रा अभी तक दक्षिण राजस्थान के बांसवाडा, डूंगरपुर, उदयपुर, राजसमंद व आदिवासी बहुल्य सिरोही व बाली क्षेत्र से निकल कर जयपुर आई है। दूसरी तरफ दक्षिण राजस्थान से पाकिस्तान की सीमा से निकलकर बाडमेर, जोधपुर, ब्यावर, अजमेर होकर जयपुर पहुंची एवं उत्तरी राजस्थान हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू, झूंझनू व सीकर के नीम का थाने के इलाके से होती हुई जयपुर पहुंची और अलवर से भी एक यात्रा जयपुर पहुंची। अभी तक इन यात्राओं में जन एवं नुक्कड सभाओं  के जरिये 10 हजार से ज्यादा लोगो से सम्पर्क हुआ है एवं हजारों लोगो के हस्ताक्षर इन मांगों  पर लिये गये है। 

कविता श्रीवास्तव 
पी यू सी एल की महासचिव कविता श्रीवास्तव  ने कहा कि दुनिया में हर पॉच मिनट में एक बच्चे की मौत होती हैं लेकिन दर्दनाक एवं शर्मनाक तो हमारे देश का आंकड़ा हैं जहॉ हर मिनट में तीन बच्चो की मौत हो जाती हैं, इस पर सब लोगो ने ‘‘मनमोहन सिंह शर्म करो, अशोक गहलोत शर्म करो,’’ के नारे लगाये। हमारे देश की आर्थिक वृद्धि की कहानी यही हैं कि भूख एवं कुपोषण घटा नही हैं। सरकार से पूछा कि क्या आप के लिए यह चिन्ता का विषय नही  हैं? सभी के  लिए तो यह इतना गम्भीर मुद्दा हैं कि सभी  प्रदेश और देश में अपना आन्दोलन और तीव्र करेंगे।

उच्चतम न्यायालय आयुक्त के सलाहकार अशोक खण्डेलवाल ने कहा राजस्थान के कोने-कोने से आवाज इस तरह उठ रही है कि सच्चाई यह है कि इस वक्त देश के एफ.सी.आई. गोदामों में 8 करोड टन से भी ज्यादा अनाज रखा हुआ है जो खरीफ की फसल के बाद दिसम्बर तक बढ़कर 10 करोड टन होने वाला है । वहीं दूसरी ओर बडे पैमाने में बच्चे, बूढे एवं वयस्क भूखे और कुपोषित है। क्यो ? इस अन्याय के होते देश की सरकारें, संसद, मीडीया एवं उच्च व मध्यम वर्ग के लोग मौन क्यो है? हर भूख और कुपोषित जीवन एवं अकाल मौतो के हम सब जिम्मेदार हैं। उन्होने आंकडो के जरिये दर्शाया कि प्रदेश में खाद्यान्न, दाल व तेल की बिल्कुल कमी नहीं है। जरूरत है राजनैतिक इच्छा शक्ति की ।

घरेलू कामगार यूनियन की रंजना ने कहा कि प्रवासी मजदूर चाहे राज्य के हो या बाहर के सभी को राशनकार्ड सबको मिलना चाहिए व सबको सस्ता अनाज, दाल, और खाने पकाने तेल दो। बिहारी, बंगाली के नाम पर सरकार व प्रशासन द्वारा की जा रही भेदभाव की निन्दा की। इसी तरह विश्वकर्मा निर्माण मजदूर यूनियन की तरफ से बुद्धिप्रकाश ने कहा कि अगर गुजरात राज्य मोबाईल राशन कार्ड वहां निर्माण मजदूरों को दे सकता है तो राजस्थान क्यों नही? आदिवासी विकास मंच के कालू जी ने कहा कि नरेगा में 100 दिन काम दो और पूरी मजदूरी का हक मत छिनो। आदिवासी इलाके में नरेगा का काम 200 दिन करो। चोहटन इलाके से आये ने जोर कि सभी एकल महिलायें, विकलांग व बुजुर्गो को बिना शर्त 2000 रूपय पेंशन दोे।  बच्चा पैदा होने के 6 माह तक मां को 2000 रूपये प्रतिमाह मातृत्व लाभ मिले। 

आस्था से आये श्याम जी ने उदयपुर के भूखमरी के इलाको में गोदाम न होने का जीक्र किया कि राजसंमद जिले में एक भी गोदाम नही है व मांग की हर तहसील में खाद्यान्न सुरक्षा हेतु गोदाम हो। न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ हर किसान के पास हो व न्यूनतम समर्थन मूल्य का जोड उसे बढ़ाया जाये। नीम का थाना से वीरचक्र जयराम ने कहा कि जल, जंगल, जमीन का पहला हक खाद्यान को लेकर हो ना कि बांध खनन व फैक्ट्रीयों का। भारत ज्ञान विज्ञान समिति से कोमल श्रीवास्तव ने कहा कि  जयपुर में बाढ पीड़ितों के घर व आजीविका का साधन तुरन्त उपलब्द्य कराया जाये। मुआवजा सहित प्रभावित लोगों को संबल दिया जाए। सभी को बीपीएल मानते हुए सस्ते खाद्यान्न की सुविधा दी जाए एवं जब तक वैकल्पिक घर की व्यवस्था लोगों के आजीविका साधनों को देखते हुए न बने तब तक आमानाशाह के नाले पर बसी बस्तियों को न उजाड़ा जाए, अदालतों को निर्णय जो भी हो। 

उपरोक्त सभी मांगों को प्रस्तावित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून में प्रभावी रूप से समाहित किया जाये, साथ ही कानून में स्वतंत्र शिकायत निवारण व्यवस्था जिला एवं राज्य स्तर पर कायम की जाये व अगर हक प्राप्त ना हो तो जुर्माना व दण्ड अधिकारियों पर हो। 

निर्माण मजदूर एवं जनरल यूनियन के हरकेश बुगालिया ने कहा कि  देश में बढती मंहगाई से खाद्यान की कीमतें बाजार में निरन्तर बढ़ती ही जा रही है। हाल ही में डीजल एवं पेट्रोल की कीमतो में बेशुमार बढ़ोतरी से जीवन यापन की आधारभूत चीजों को प्राप्त करना अब आम व्यक्ति के लिए मुश्किल हो गया है। इससे शहर -गांव सभी जगह के गरीब, निम्न व मध्यम वर्ग पर रसोई व चूल्हे का संकट गहरा रहा है। 

एक रैली के रूप में राज्यपाल एवं प्रधानमंत्री को ज्ञापन देने स्टेच्यू सर्किल से सिविल लाईन फाटक की ओर प्रस्थान किया लेकिन स्थानिय पुलिस का बहुत बडी तादात में महिला पुलिस जरिये राजमहल पैलेस पर ही रैली को रोक दिया गया। जनता पुलिस के बीच में संघर्ष हुआ कि सिविल लाईंस फाटक तक उनको जाने दिया जाये लेकिन पुलिस के न मानने पर लोग सड़क पर ही बैठ गये और गीत-नारे लगाते रहे। कलेक्टर की तरफ से कार्यपालक मजिस्ट्रेट नरेन्द्र सिंह राठौड़ ने ज्ञापन लिया।


दोपहर में 12.30 बजे मुख्य सचिव ने अशोक खण्डेलवाल के नेतृत्व में गया 15 सदस्यीय दल से भेंट की एवं मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन लिया साथ ही उन्होंने अभियान द्वारा उठाये गये मुद्दे जिससे राजस्थान को भूख व कुपोषण से मुक्ति दिलाई जा सकती है उस पर गौर किया एवं एक व्यवस्थीत बातचीत के लिए बुलाने के लिए वायदा किया। 

राजस्थान के पुलिस महानिदेशक का हिस्ट्रीशीटर के साथ रहना निन्दनीय


अनेक अखबारो में यह समाचार प्रकाषित हुआ है कि राजस्थान के पुलिस महानिदेशक अपनी निजी यात्रा के नाम पर कोटा, बूंदी में लगातार एक नामी हिस्ट्रशीटर के साथ रहे बहुत ही आश्चर्यजनक व हैरान करने वाला है। इससे आम जनता में पुलिस के प्रति रहा-सहा विश्वास भी समाप्त हो जायेगा। जब राज्य का सबसे बडा पुलिस अधिकारी अपराधियों की संगत में रहता हो तो कानून के पालन करने वाले नागरिक पुलिस से अपनी रक्षा की कोई उम्मीद नही कर सकते हैं। उनका यह कहना समाज के कार्यक्रम में निजी यात्रा पर गये थे कोई इससे उन्हें अपराधियों की संगत करने की छुट  नहीं मिलती शायद उन्होने  भी यह कहावत सुनी होगी कि ‘‘व्यक्ति का चरित्र उसकी संगत से ही जाना जाता है’’। लोगो में उनके इस कृत्य से क्या संदेश जायेगा यह स्पष्ट है। 

सरकार को भी इस घटना को गंभीरता से लेना चाहिये और तत्काल उचित कार्यवाही करनी चाहिये ताकि लोगों में उसके प्रति विश्वास की बहाली हो सके। यह भी देखा गया कि उनके आगमन के सम्बन्ध में कई स्थानों पर हॉर्डिग्स भी लगाये गये थे ऐसा लगता था कि शायद वे भी राजनीति में अपने प्रवेश  की जमीन तैयार कर रहे है। बेहतर है कि वे स्वंय अपने पद से हट जाये। 


पप्पू 

Rajasthan Khady Yatra Jaipur Programme


PUCL State Level Meeting 22 23rd September, 2012


Floods in Jaipur August, 2012


Free cancer screening camp in Khejri Health Center, Jagatpura, Jaipur




मंगलवार, 1 मई 2012

बाल श्रम मुक्त जयपुर अभियान की शुरूआत


राजस्थान बाल अधिकार सरक्षंण साझा अभियान, राजस्थान राज्य बाल अधिकार सरक्षंण आयोग व एक्शन एड राजस्थान, की पहल से एवं जिला प्रषासन, जयपुर पुलिस व श्रम विभाग के सहयोग से जयपुर में 1 मई 2012 से बाल श्रम मुक्त जयपुर अभियान की शुरूआत की गई।

अभियान की शुरूआत में माननीय मुख्यमंत्री श्री अषोक गहलोत ने प्रातः 10 बजे अपने निवास स्थान पर बाल श्रम मुक्त जयपुर अभियान के पोस्टर का विमोचन किया जहॉ विभिन्न संस्थाओं द्वारा संचालित गृहों के बच्चों तथा विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों जिनमें सेव द् चिल्ड्रन, प्लान इण्डिया, जे.के.एस.एम. एस. आई इण्डिया, एफ.एक्स.बी, टाबर संस्था के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

तदोपरान्त  पिंक सिटी प्रेस क्लब में अभियान उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता श्रीमती दीपक कालरा, अध्यक्ष राजस्थान राज्य बाल अधिकार सरक्षंण आयोग द्वारा की गई। इसमें विषिष्ठ अतिथि के रूप में पुलिस कमीश्नर श्री बी.एल. सोनी, अतिरिक्त जिला कलेक्टर श्री जसवंत सिंह, अतिरिक्त श्रम आयुक्त श्रीमती अंजना दिक्षित व जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री गणपत आर्चाय ने भाग लिया। 

सर्वप्रथम श्रीमती शबनम अजीज ने अभियान का परिचय दिया तथा अभियान की आवष्यकता के बारे में बताया। पुलिस कमीश्नर श्री बी.एल. सोनी, अतिरिक्त जिला कलेक्टर श्री जसवंत सिंह ने आष्वासन दिया कि पुलिस व जिला प्रषासन इस अभियान के साथ पूर्ण सहयोग करेंगें तथा साथ मिल कर इस अभियान के माध्यम से समाज में फैली इस भयानक बुराई को मिल कर मिटानें के लिए प्रयास करेगें। राज्य बाल आयोग की अध्यक्ष श्रीमती दीपक कालरा ने कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए सभी को मिल कर प्रयास करना होगा तभी हम समाज में बाल श्रम की समस्या को मिटा सकते है।  

अभियान के उद्घाटन समारोह में 250 से अधिक लोगों ने भाग लिया जिसमें विभिन्न निजी विद्यालयों के बच्चों स्वयं सेवी सस्थाओं संगठनों व सरकारी विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।

सोमवार, 9 अप्रैल 2012

उच्चतम न्यायालय से डॉ. खलील चिश्ती को मिली जमानत पहला कदम लेकिन पूरा नहीं-अपनों के बीच में जाने का इंतजार जारी रहेगा।


Dr. Khalil Chisty

पी.यू.सी.एल. राजस्थान को इस बात की खुशी है कि उच्चतम न्यायालय के न्यायधीशों ने आज डॉ. खलील चिश्ती को 14 माह 10 दिन के कारावास के बाद जमानत पर रिहा किया। लेकिन डॉ. चिश्ती के लिए यह रिहाई उन्हें जेल के सलाखों के बाहर जरूर करेगी लेकिन वे पाकिस्तान में अपने घर अभी भी नहीं जा सकते है। उच्चतम न्यायालय का निर्णय एक महत्वपूर्ण पहला कदम के रूप में माना जा सकता है लेकिन अभी डॉ. चिश्ती को अदालत के आगामी निर्णयों का इंतजार करना पड़ेगा। 

पी.यू.सी.एल. का मानना है कि न्यायिक प्रक्रिया डॉ. चिश्ती के लिए हमेशा से ही खुली थी। लेकिन जो कर्त्तव्य राजस्थान के राज्यपाल श्री शिवराज पाटिल को निभाना था वह उन्होंने नहीं निभाया। दया याचिका उनके पास 11 माह से पहुंची हुई है। 2 बार मुख्यमंत्री ने उनके पास भेजी है लेकिन उन्होंने उस पर हस्ताक्षर नहीं किया। अभी भी उनकी दया याचिका राज्यपाल की फाइलो के जाल में फंसी हुई है, राज्यपाल के हस्ताक्षर के लिए अभी भी तरस रही है। अगर वह हस्ताक्षर हो गये होते तो डॉ. चिश्ती पहले ही घर पहुंच गये होते। 

19 साल डॉ. चिश्ती जब जमानत पर थे तब वे अजमेर में एक तरीके से घर में कैद थे। समय समय पर थाने में हाजिरी लगाने जाते और अजमेर के बाहर एक घर की चार दिवारी तक सीमित थे। उम्मीद है कि डॉ. चिश्ती की रिहाई घर में लम्बे समय तक कैद होने के समान न हो जाये। 

पी.यू.सी.एल. पूनः मांग करता है कि जैसे डॉ. चिश्ती की दया याचिका पर राजस्थान के राज्यपाल शिवराज पाटिल के हस्ताक्षर का इंतजार है। उसी तरह पाकिस्तान के जेल में 22 वर्ष से आतंकवाद के नाम पर बन्द भारतीय नागरिक सरबजीत की दया याचिका पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के हस्ताक्षर का इंतजार कर रही है। पाकिस्तान को सरबजीत की सजा-ए-मौत को आजीवन कारावास में तबदील कर उन्हें भारत भिजवा देना चाहिये। 

डॉ. चिश्ती व सरबजीत पाकिस्तान-भारत के बीच राजनीति के कारण अपनों से और अपने वतन से दूर सलाखों के पीछे बंद है। 

श्री बी.एल. वेद्य के हाथों द्वारा लेबोरेटरी, आधुनिक उपकरणों एवं नेत्र जाँच कक्ष का उदघाटन समारोह सम्पन्न हुआ।


खेजड़ी सर्वोदय सामान्य स्वास्थ्य एवं आई केयर सेन्टर में आज दिनांक 9 अप्रैल, 2012 को  प्रातः 10.30 बजे लेबोरेटरी,आधुनिक उपकरणों एवं नेत्र जाँच कक्ष का उदघाटन श्री बी.एल. बेेद्य, अध्यक्ष जयपुर वर्ल्ड सिटी सोसायटी, प्रो. डॉ. कमला चन्द्रा के हाथों द्वारा किया गया। उदघाटन समारोह में डॉ. टी.के.एन. उन्नीथान, पूर्व कुलपति राजस्थान यूर्निवसिटी, डॉ. अल्का रॉव, श्री एम.के. खण्डेलवाल, सचिव, जयपुर वर्ल्ड सिटी सोसायटी, भी मौजूद थे। श्रीमति जी.जे. उन्नीथान मानद निदेषक, खेजड़ी स्वास्थ्य केन्द्र के द्वारा सभी का स्वागत किया गया। उदघाटन समारोह में 100 से भी अधिक लोगों ने भाग लिया।

पिछले 17 वर्षो से खेजड़ी सर्वोदय स्वास्थ्य केन्द्र इस क्षेत्र के निवासियों को बहुत ही कम दरों पर अच्छी चिकित्सा, निःषुल्क दवाईयां और बेहतर सेवायें उपलब्ध करवा रहा है। समय-समय पर गांवों में सामान्य स्वास्थ्य व नेत्र केम्प लगता आ रहा है और टोडीरमजानीपुरा गांव के आस पास लगभग 10 से अधिक गावों के सरकारी व गैर सरकारी विद्यालय में छात्र/छात्राओं को निःशुल्क स्वास्थ्य शिक्षा एव निः स्वास्थ्य प्रशिक्षण करता आ रहा है। आस पास के इलाके के गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, कपडा, विद्यालय फिस, दवाईयां आदि निःशुल्क देता आ रहा है। हमारा उद्देष्य अधिक से अधिक रोगियों का उपचार एवं सहायता प्रदान करना है।
Khejri Sarvodaya General Health & Eye Care Center Staff Members



भँवर लाल कुमावत
समन्वयक

गुरुवार, 22 मार्च 2012

श्री श्री ने कहा कि सरकारी विद्यालयों के बच्चे नक्सलवाद में जाते है


पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल (पीयूसीएल) ने आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता रविशंकर के उस वक्तव्य की कड़े शब्दों में निंदा की है जिसमें उन्होंने यह कहा है कि ‘‘....सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चे नक्सलवाद और हिंसा की तरफ प्रेरित होते हैं...... इसलिए सरकारी स्कूल और कॉलेज बन्द करके निजी हाथों में थमा देने चाहिए....... आदर्श विद्यालय सब जगह पहुंचने चाहिए’’। पीयूसीएल मांग करता है कि रविशंकर इस बात का सबूत पेश करें कि देशभर के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छह से 14 वर्ष के 16 करोड़ बच्चे किस तरह से नक्सलवाद एवं हिंसा में सम्मिलित हैं। हम इस तरह की सोच का तिरस्कार करते हैं। 


असलियत तो यह है कि रविशंकर जो कॉरपोरेट जगत के बनाये हुए स्वयंभू आध्यात्मिक गुरू हैं, इसलिए वो एक अंतर्राष्ट्रीय व्यावसायिक ब्रांड बन चुके हैं। वें निजी और कॉरपोरेट क्षेत्र के मुनाफे की बात करेंगे, जहां शिक्षा मूल्य न होकर एक मुनाफा आधारित उद्योग है। 

पी.यू.सी.एल. का मानना है कि यह वक्तव्य संविधान विरोधी भी है क्योंकि :- 
  • यह अनुच्छेद 21ए जिसमें शिक्षा का अधिकार सम्मिलित है एवं सरकार को 6 से 14 वर्ष के बच्चों को अनिवार्य व मुफ्त शिक्षा देने के लिए बाध्य करता है, की अवहेलना करता है। 
  • इस वक्तव्य के पीछे उनकी खतरनाक मंशा इसलिए भी जाहिर होती है क्योंकि रविशंकर सावरकर, गोलवकर एवं आरएसएस की विचारधारा पर आधारित शिक्षा जो आदर्श विद्या सोसायटी अपने आदर्श विद्या मन्दिर स्कूलों के जरिए देता है उसे देशभर में स्थापित करना चाहते हैं न की संवैधानिक, धर्मनिरपेक्ष, बराबरी, लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा।

पी.यू.सी.एल. रविशंकर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करते हैं।